कसडोल। जल संसाधन विभाग के अंतर्गत उपसंभाग गिरौदपुरी में जोक नदी पर 5 करोड़ 84 लाख 11 हजार रुपये की लागत से संचालित व्यपवर्तन शीर्ष जीर्णोद्धार एवं डाउनस्ट्रीम तटबंध निर्माण कार्य विवादों में घिर गया है।
स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में अनियमितता, घटिया सामग्री के उपयोग, अवैध रेत खनन, बिजली के कथित अवैध उपयोग तथा नाबालिगों से कार्य कराए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार ठेका प्राप्त करने वाले ठेकेदार विक्रम खंडेलवाल द्वारा निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं कराया जा रहा है। उनका आरोप है कि निर्माण में निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे तटबंध की मजबूती और दीर्घकालिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही रेत प्रतिबंध के बावजूद अवैध रूप से खनन कर लाई जा रही है। इससे शासन को राजस्व हानि होने की आशंका जताई जा रही है। मामले की शिकायत मिलने के बाद वन विभाग ने संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
निर्माण स्थल पर बिजली उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्य के लिए ग्राम पंचायत अर्जुनी के बिजली कनेक्शन का उपयोग किया जा रहा था, जबकि स्थल पर जनरेटर की व्यवस्था उपलब्ध है। इस संबंध में संबंधित विभाग द्वारा जांच की बात कही गई है।
ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर सूचना पटल नहीं लगाए जाने पर भी नाराजगी व्यक्त की है। नियमानुसार किसी भी शासकीय निर्माण कार्य की लागत, कार्यदायी संस्था, स्वीकृत राशि एवं अन्य आवश्यक जानकारियां सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जानी चाहिए, लेकिन मौके पर ऐसा नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
वहीं ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निर्माण कार्य में नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराई जा रही है, जो श्रम कानूनों का उल्लंघन है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन बच्चों का निर्माण कार्य पर मजदूरी करते हुए वीडियो भी वायरल हो रहा हैं
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच किस प्रकार करते हैं तथा जांच में यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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