शिवरीनारायण-धर्म, भक्ति और अध्यात्म की त्रिवेणी कहे जाने वाली पावन नगरी शिवरीनारायण एक बार फिर श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंग गई, जब मठ मंदिर परिसर में गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की जयंती को भव्यता, श्रद्धा और दिव्यता के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मानस के विद्वान वक्ताओं, श्रद्धालुओं और अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति रही। समारोह के दौरान राजेश्री महामंडलेश्वर महंत रामसुंदर दास महाराज ने पत्रकारों को वस्त्र व प्रोत्साहन राशि भेंटकर सम्मानित किया।
*सम्मान प्राप्त करने वालों में प्रमुख रूप से*:
प्रेस क्लब के सचिव श्री संतोष अग्रवाल,वरिष्ठ पत्रकार गोपाल कैवर्त्य, अजय कैवर्त्य,जांजगीर से आए श्री राजकुमार साहू, मुकेश सिंह बैस, डायमंड शुक्ला, राजेश सिंह क्षत्री और प्रशांत सिंह ठाकुर सहित अन्य पत्रकारगण सम्मिलित रहे।
*राजेश्री महंत रामसुंदर दास महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा* - “तुलसीदास जी की भांति हमारे पत्रकार बंधु भी धर्म, संस्कृति और श्रीराम के आदर्शों के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
वे धार्मिक आयोजनों के प्रचारक बनकर समाज में धर्म का दीप जला रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा –
*रामकाज किन्हें बिना मोहि कहाँ विश्राम*
हमें जो भी जीवन-दायित्व मिला है, वह भगवान रघुवर सरकार का कार्य मानकर करना चाहिए।
सत्य और निष्ठा से किया गया कर्म ही भारत को पुनः 'जगद्गुरु' बना सकता है — यही मेरी कामना और आग्रह है।”
*शिवरीनारायण प्रेस क्लब के सचिव श्री संतोष अग्रवाल ने कहा*–“मठ मंदिर में पूज्य महंत जी द्वारा पूरे वर्ष भर अनेक भव्य धार्मिक आयोजन होते रहते हैं।
सावन झूला महोत्सव, जल झूलनी एकादशी, गद्दी पूजन महोत्सव, विजयादशमी उत्सव, माघ पूर्णिमा मेला, जन्माष्टमी जैसे पर्व अत्यंत श्रद्धा और दिव्यता के साथ मनाए जाते हैं। साथ ही श्रीरामकथा व श्रीमद्भागवत जैसे पावन आयोजनों का भी भव्य आयोजन किया जाता है।यह हमारा सौभाग्य है कि महंत जी की कृपा से हमें इन पावन अवसरों की कथा अपनी लेखनी से लिखने का सौभाग्य प्राप्त होता है।”
पत्रकारों को मिले इस सम्मान ने न केवल उनके मन में आत्मीयता और श्रद्धा भरी, बल्कि यह आयोजन यह भी सिद्ध करता है कि धार्मिक आयोजनों में मीडिया की भूमिका केवल सूचना तक सीमित नहीं, बल्कि वे सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना के संवाहक हैं।
कार्यक्रम का समापन भजन, पूजन,आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ भव्य रूप में सम्पन्न हुआ।
No comments:
Post a Comment