छत्तीसगढ़ केवट निषाद समाज के स्वाभिमानी मतदाता बंधुओं, आज का यह समय केवल प्रदेश अध्यक्ष चुनने का नहीं है बल्कि अपने भविष्य, अपने स्वाभिमान और अपने समाज की दिशा तय करने का समय है। माननीय श्री कुंवर सिंह निषाद जी कोई साधारण नाम नहीं हैं, वे संघर्ष, सेवा और समर्पण की पहचान हैं।
उन्होंने अपनी क्षमता, मेहनत और सामाजिक सहयोग के बल पर विधायक बनकर यह सिद्ध कर दिया कि जब नेतृत्व मजबूत होता है तो समाज स्वतः मजबूत होता है। विधायक बनने के बाद उन्होंने समाज से कभी मुँह नहीं मोड़ा बल्कि समाज की सेवा को ही अपना धर्म बनाया। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष बनकर उन्होंने केवट निषाद समाज की भावनाओं को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखा बल्कि उन्हें सामाजिक भवनों, संगठन की मजबूती, सम्मान और एकता के रूप में जमीन पर उतारकर दिखाया। समाज के लिए बड़े-बड़े भवनों का निर्माण, संगठन को सशक्त करना और समाज को एक सूत्र में बाँधना यह सब कागज़ी वादे नहीं बल्कि प्रत्यक्ष दिखाई देने वाला काम है। आज वही माननीय श्री कुंवर सिंह निषाद जी फिर से प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए खड़े हैं क्योंकि उनका सपना अभी अधूरा है, समाज को संगठित, सशक्त और स्वाभिमानी बनाना अभी बाकी है। आज समाज को गुमराह करने वालों से सावधान रहने की जरूरत है, जो लोग समाज को बाँटने का काम करते हैं, जो मेहनत करने वाले नेता पर सवाल उठाते हैं, जो बिना काम किए भ्रम फैलाते हैं, वे समाज के हितैषी नहीं हो सकते। याद रखिए समाज को जोड़ने वाला ही सच्चा नेता होता है, तोड़ने वाला नहीं। आज अपनी अंतरात्मा से एक ही सवाल पूछिए क्या हमने ऐसा नेता देखा है जिसने कहा भी हो और करके भी दिखाया हो, यदि जवाब हाँ है तो वह नाम है माननीय श्री कुंवर सिंह निषाद जी। यह बात कड़वी है लेकिन सच है और सच कहना ज़रूरी है, यदि माननीय श्री कुंवर सिंह निषाद जी यह चुनाव हारते हैं तो यह हार किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे केवट निषाद समाज की राजनीतिक छवि की हार होगी। जिस व्यक्ति ने अपनी ऊर्जा और क्षमता के बल पर विधायक बनकर समाज को पहचान दिलाई, जिसने प्रदेश अध्यक्ष बनकर समाज को संगठित किया, चाहे कसडोल के छरछेद की घटना हो या बिलासपुर जिले में दो मासूम बच्चों की दुर्घटना, हर जगह समाज की आवाज़ बनकर खड़ा रहा, जिसने समाज की भावनाओं को भवन, संगठन और सम्मान में बदला, यदि वही नेता हारता है तो बाहर की दुनिया यही कहेगी कि यह समाज अपने काम करने वाले नेता को भी नहीं पहचान सका। इससे समाज की राजनीतिक पकड़ कमजोर होगी, समाज की आवाज़ दबेगी और आने वाले समय में हमारे समाज को हल्के में लिया जाएगा। याद रखिए राजनीति में व्यक्ति नहीं बल्कि छवि हारती और जीतती है और श्री कुंवर सिंह निषाद जी की हार केवट निषाद समाज की सामूहिक हार मानी जाएगी। आज फैसला केवल मतपेटी में नहीं बल्कि हमारी समझ, एकता और दूरदर्शिता में है। भावनाओं में बहकर, भ्रम या बहकावे में आकर लिया गया निर्णय पूरे समाज को वर्षों पीछे धकेल सकता है। इसलिए समाज के जिम्मेदार मतदाताओं से अपील है कि अपने बच्चों के भविष्य, अपने समाज के सम्मान और अपनी राजनीतिक ताकत को सुरक्षित रखने के लिए काम करने वाले को ही चुनिए, आजमाए हुए नेतृत्व को ही आगे बढ़ाइए क्योंकि श्री कुंवर सिंह निषाद जी की जीत ही केवट निषाद समाज की इज्जत, पहचान और मजबूती है। जय निषाद केवट समाज, जय एकता, जय स्वाभिमान।




















